Suzlon Energy ने दिसंबर 2025 खत्म तिमाही (Q3 FY26) में अच्छा प्रदर्शन दिखाया है, हालांकि बाजार की उम्मीदों से थोड़ा कमजोर रहा। कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट करीब 445 करोड़ रुपये रहा, जो साल-दर-साल लगभग 15 प्रतिशत की बढ़त है। राजस्व में जोरदार उछाल देखने को मिला और यह बढ़कर करीब 4,228 करोड़ रुपये पहुँच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही से लगभग 42 प्रतिशत ज्यादा है। कंपनी ने इस तिमाही में 617 मेगावाट की सबसे ज्यादा तिमाही डिलीवरी की, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 447 मेगावाट थी
प्रॉफिट, मार्जिन और कर्ज की स्थिति
कंपनी का EBITDA इस तिमाही में बढ़कर करीब 739 करोड़ रुपये रहा, जो साल-दर-साल लगभग 48 प्रतिशत की तेजी दिखाता है। EBITDA मार्जिन भी 16.8 प्रतिशत से सुधार कर करीब 17.4–17.5 प्रतिशत के स्तर पर रहा, जो ऑपरेशन में बेहतर दक्षता दिखाता है। Suzlon ने अपनी बैलेंस शीट भी मजबूत की है और कंपनी नेट कैश पोजिशन में है, जिसमें लगभग 1,500 करोड़ रुपये से ज्यादा की नेट कैश स्थिति दर्ज की गई है। यह स्थिति भविष्य के प्रोजेक्ट्स और कैपेक्स के लिए कंपनी को अतिरिक्त मजबूती देती है।
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Nuvama का BUY कॉल और टारगेट प्राइस
तिमाही नतीजों के बाद भी ब्रोकरेज फर्म Nuvama ने Suzlon पर अपना रुख पॉजिटिव रखा है और स्टॉक पर BUY रेटिंग बनाए रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी का Q3 में एक्जीक्यूशन 617 मेगावाट रहा, जो बाजार की लगभग 740 मेगावाट की उम्मीद से कम था, इसी वजह से PAT अनुमान से करीब 7 प्रतिशत नीचे रहा। Nuvama ने EPS के अनुमान में FY26 के लिए करीब 6 प्रतिशत और FY27 के लिए 11 प्रतिशत की कटौती की है, लेकिन इसके बावजूद टारगेट प्राइस 60 रुपये से घटाकर 55 रुपये रखते हुए BUY की सलाह जारी रखी है। ब्रोकरेज मानता है कि FY26 में करीब 60 प्रतिशत सालाना ग्रोथ (सेल्स, EBITDA, PAT) संभव है और इसके लिए Q4 में लगभग 850 मेगावाट एक्जीक्यूशन करना होगा
शेयर प्राइस, रिटर्न और FII की दिलचस्पी
5 फरवरी 2026 तक Suzlon Energy का मार्केट कैप लगभग 65,600 करोड़ रुपये के आसपास रहा है। पिछले एक हफ्ते में शेयर मात्र करीब 0.86 प्रतिशत चढ़ा है, जबकि पिछले तीन महीनों में इसमें लगभग 20 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। एक साल की अवधि में भी शेयर करीब 14 प्रतिशत टूटा है और यह अपने 52-वीक हाई से लगभग 35–36 प्रतिशत नीचे ट्रेड कर रहा है। सकारात्मक पहलू यह है कि दिसंबर 2025 तिमाही में FII और FPI की हिस्सेदारी 22.70 प्रतिशत से बढ़कर 23.73 प्रतिशत हो गई है, जो बड़े निवेशकों के भरोसे को दिखाती है
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