Semiconductor कंपनी का शेयर पिछले 20 महीनों में लगभग 15 रुपये से चढ़कर 11,000 रुपये के पार पहुंच गया है, जिससे निवेशकों को 70,000 प्रतिशत से ज्यादा का मल्टीबैगर रिटर्न मिला है। यह तेजी भारतीय शेयर बाजार में हाल के समय की सबसे चर्चा में रहने वाली रैलियों में शामिल हो चुकी है।
कंपनी का बैकग्राउंड
RRP Semiconductor Ltd पहले एक रियल एस्टेट से जुड़ा बिजनेस करती थी, बाद में कंपनी ने अपना नाम बदलकर सेमीकंडक्टर सेक्टर की ओर रुख किया। रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी के प्रमोटर राजेंद्र चोडणकर हैं, जिन्होंने बिजनेस मॉडल को बदलते हुए इसे नई टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर थीम से जोड़ा। अभी कंपनी का असली सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन शुरू होना बाकी है और इसने सरकारी सेमीकंडक्टर पॉलिसी के तहत कोई आवेदन भी नहीं किया है।
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शेयर ने कब से देना शुरू किया जोरदार रिटर्न
उपलब्ध डेटा के मुताबिक 2 अप्रैल 2024 को RRP Semiconductor का शेयर लगभग 15 रुपये के स्तर पर था। इसके बाद कुछ महीनों तक धीरे‑धीरे बढ़ने के बाद 2025 में इसने जबरदस्त तेजी दिखाई और 15 दिसंबर 2025 तक यह 11,094.95 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। सिर्फ 20 महीने में 15 रुपये से 11,094.95 रुपये तक का सफर लगभग 73,866 प्रतिशत से ज्यादा रिटर्न दिखाता है, यानी 13,514 रुपये की शुरुआती रकम लगभग 1 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच सकती थी।
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रैली के पीछे मुख्य कारण
कंपनी की कीमत में आई तेज रैली के पीछे सबसे बड़ा कारण सेमीकंडक्टर और AI थीम को लेकर बाजार में बनी जबरदस्त उत्सुकता मानी जा रही है। कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इस स्टॉक में फ्री फ्लोट बहुत कम है और रोजाना बहुत कम शेयरों की डील हो रही है, जिससे थोड़ी खरीद भी प्राइस को तेजी से ऊपर ले जा रही है। कंपनी का शेयर अपनी बुक वैल्यू के मुकाबले हजारों गुना वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है और एक साल में इसने करीब 7,400 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया है।
रेगुलेटर की सतर्कता
इतनी तेज रैली के बाद अब RRP Semiconductor पर रेगुलेटरी नजर भी बढ़ गई है। BSE ने इसे Additional Surveillance Measure (ASM) फ्रेमवर्क के तहत रखा है और ट्रेडिंग पर कई तरह की पाबंदियां लगाई हैं, जिससे शेयर की लिक्विडिटी पर असर पड़ सकता है। ताजा तिमाही नतीजों में कंपनी ने सितंबर 2025 के लिए लगभग 6.82 करोड़ रुपये की नेगेटिव रेवेन्यू और करीब 7.16 करोड़ रुपये का नेट लॉस रिपोर्ट किया है, जो दिखाता है कि प्राइस रैली के मुकाबले फाइनेंशियल प्रदर्शन अभी कमजोर है।
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