AI और Semiconductor बूम की चर्चा होते ही आमतौर पर सबसे पहले नाम Nvidia का आता है, लेकिन हाल के महीनों में भारत की एक छोटी कंपनी RRP Semiconductor ने रिटर्न के मामले में इसे भी पीछे छोड़ दिया है। करीब 20–21 महीनों की अवधि में इस स्टॉक ने 70,000% से ज्यादा का रिटर्न दिया, जिससे यह दुनिया के सबसे तेज़ी से चढ़ने वाले AI–थीम वाले शेयरों में शामिल हो गया।
21 महीनों में 73,866% जैसा रिटर्न कैसे बना?
अप्रैल 2024 के आसपास RRP Semiconductor के शेयर करीब 20 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहे थे और बाजार में इसकी लगभग कोई चर्चा नहीं थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर इसे भारत के सेमीकंडक्टर और AI भविष्य से जोड़कर पेश किया जाने लगा, जिसके बाद करीब 140–150 ट्रेडिंग सेशंस तक शेयर लगातार अपर सर्किट में बंद होता रहा और भाव कुछ सौ रुपये से बढ़कर 11,000 रुपये से ऊपर तक पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का मार्केट कैप लगभग 1.7 अरब डॉलर (करीब 15,000–16,000 करोड़ रुपये) तक पहुंच गया, जबकि समान अवधि में Nvidia का रिटर्न लगभग 98% के आसपास रहा।
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असल बिजनेस और ताज़ा वित्तीय स्थिति
शेयर की रॉकेट जैसी तेजी के बीच कंपनी के ताज़ा नतीजे बिल्कुल अलग कहानी बताते हैं। सितंबर 2025 तिमाही में RRP Semiconductor ने लगभग 68.2 करोड़ रुपये का नेगेटिव रेवेन्यू और करीब 71.5 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया है। यह नेगेटिव रेवेन्यू नवंबर 2024 में Telecrown Infratech से मिले लगभग 440 करोड़ रुपये के ऑर्डर के रद्द हो जाने के बाद पहले बुक की गई सेल्स को रिवर्स करने के कारण दिखा, जो 106 मेगावाट सोलर PV मॉड्यूल प्रोजेक्ट के लिए सिलिकॉन सोलर सेल्स और अन्य मटेरियल की सप्लाई से जुड़ा था।
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नाम बदलने, ऑर्डर
यह कंपनी पहले G D Trading and Agencies नाम से रियल एस्टेट से जुड़े काम करती थी, जिसे प्रमोटर राजेंद्र चोडणकर ने खरीदकर 2024 की शुरुआत में RRP Semiconductor के रूप में रीब्रांड किया। अप्रैल 2024 में बोर्ड ने कुछ शेयर लगभग 12 रुपये के डिस्काउंट भाव पर बेचने की मंजूरी दी, जिसके बाद प्रमोटर की हिस्सेदारी लगभग 74.5% तक पहुंच गई और पुरानी प्रमोटर होल्डिंग 2% से भी कम रह गई। इसी दौरान चोडणकर से जुड़ी निजी कंपनी RRP Electronics Pvt. Ltd. के लिए महाराष्ट्र में सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग यूनिट की योजना की चर्चा ने भी बाजार में यह धारणा बना दी कि लिस्टेड RRP Semiconductor सीधे चिप मैन्युफैक्चरिंग में उतर चुकी है, जबकि एक्सचेंज फाइलिंग में साफ लिखा है कि कंपनी ने अभी तक कोई सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग शुरू नहीं की और न ही किसी सरकारी स्कीम के तहत आवेदन किया है।
फ्री फ्लोट, रेगुलेटरी स्कैनर और बढ़ता जोखिम
कंपनी के कुल शेयर्स में से लगभग 98% हिस्सेदारी प्रमोटर और उनसे जुड़े ग्रुप के पास होने से मार्केट में फ्री फ्लोट बहुत कम है, जिसके कारण थोड़ी सी भी खरीद शेयर को तेज़ी से ऊपर ले गई और कीमतें असामान्य स्तर तक पहुंच गईं। यही वजह है कि अब सेबी और स्टॉक एक्सचेंज दोनों इस स्टॉक की असामान्य तेजी की जांच कर रहे हैं, एक्सचेंज ने इसे हफ्ते में सिर्फ एक दिन ट्रेडिंग की कैटेगरी में डाल दिया है और अप्रैल 2025 में कंपनी के एक शेयर सेल ऑफर को मंजूर करने से भी इनकार कर चुका है, जो फिलहाल अदालत में चुनौती के रूप में लंबित है।
Disclaimer : शेयर बाजार में निवेश जोखिम के साथ होता है, इसलिए निवेश से पहले विशेषज्ञ से सलाह लें। हम जानकारी की पूर्णता या सटीकता की गारंटी नहीं देते।







