नई Defence पॉलिसी के तहत सरकार ने रक्षा खर्च को तेज रफ्तार देने का संकेत दिया है, जिसके चलते हाल के दो साल में कुल डिफेंस बजट में मिलाकर लगभग 30 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दिखाई दे रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में डिफेंस बजट करीब ₹6.81 लाख करोड़ था, जिसे 2026-27 में बढ़ाकर लगभग ₹7.84–7.85 लाख करोड़ कर दिया गया है, यानी करीब 15.5 फीसदी की वार्षिक छलांग।
मिसाइल, रडार और हाई‑टेक डील्स पर फोकस
नई नीति में फोकस सिर्फ संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि टेक्नॉलजी वाले हथियारों पर है, जैसे लॉन्ग‑रेंज मिसाइल सिस्टम, एयर डिफेंस मिसाइल, मल्टी‑फंक्शन रडार, सर्विलांस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम। बजट में लगभग ₹2.19 लाख करोड़ कैपिटल आउटले के लिए रखे गए हैं, जो फाइटर जेट, ड्रोन, रडार, वॉरशिप और सबमरीन जैसे प्लेटफॉर्म पर खर्च होंगे। भारत पहले ही Akash जैसी मिसाइल, वेपन लोकेटिंग रडार और ATAGS तोप जैसे सिस्टम घरेलू स्तर पर बना रहा है, जिससे लोकल कंपनियों के लिए बड़े ऑर्डर की जमीन तैयार हो रही है
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मेक इन इंडिया से तेज हुआ Defence प्रोडक्शन
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल Defence इक्विपमेंट का करीब 65 फीसदी हिस्सा अब भारत में ही बन रहा है, जो मेक इन इंडिया के असर को दिखाता है। स्वदेशी रक्षा उत्पादन 2023-24 के लगभग ₹1.27 लाख करोड़ से बढ़कर 2024-25 में रिकॉर्ड ₹1.54 लाख करोड़ तक पहुंच गया है और इसी दौरान डिफेंस एक्सपोर्ट भी 2024-25 में ₹23,622 करोड़ के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया। इससे साफ है कि मिसाइल, रडार, ड्रोन और नेवल प्लेटफॉर्म के नए कॉन्ट्रैक्ट का सीधा फायदा भारतीय कंपनियों को मिलने वाला है
ये स्मॉलकैप Defence स्टॉक्स हो सकते हैं फोकस में
Defence बजट बढ़ने और ऑपरेशन सिंदूर के बाद आधुनिक हथियारों की जरूरत के कारण कई स्मॉलकैप डिफेंस व संबद्ध कंपनियां निवेशकों की नजर में आ सकती हैं। मार्केट रिपोर्ट्स के मुताबिक रडार और डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स में काम करने वाली भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), मिसाइल और एम्युनिशन से जुड़ी भारत डायनेमिक्स, ड्रोन और स्पेशल एम्युनिशन ऑर्डर बुक वाली सोलर इंडस्ट्रीज़, और शिपबिल्डिंग में सक्रिय कोचीन शिपयार्ड जैसे स्टॉक्स पर विशेषज्ञ लगातार निगरानी की सलाह दे रहे हैं। एक्जीक्यूशन तेज रहा तो आने वाले सालों में इन कंपनियों की ऑर्डर बुक और रेवेन्यू पर डिफेंस बजट की यह 30 फीसदी ग्रोथ मजबूत असर डाल सकती है
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