Silver ETF: Union Budget 2026 से ठीक पहले ग्लोबल मार्केट में चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है। शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर प्राइस में एक ही दिन में करीब 37% तक की गिरावट दर्ज की गई, जो अब तक की सबसे बड़ी सिंगल‑डे फॉल मानी जा रही है। COMEX फ्यूचर्स में भी कीमतें 120 डॉलर के ऊपर से फिसल कर 80 डॉलर प्रति औंस के पास आ गईं, यानी 30% से ज्यादा की डुबकी लग गई
भारत में MCX और बुलियन मार्केट की स्थिति
भारत के MCX पर सिल्वर मार्च फ्यूचर्स ने भी जोरदार गिरावट दिखाई और एक ही दिन में करीब 27% टूटकर लगभग 2,91,900 रुपये प्रति किलोग्राम के पास आ गए। इससे पहले सिल्वर फ्यूचर्स 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचे थे, यानी एक दिन में ही लगभग 1.08 लाख रुपये प्रति किलोग्राम की वैल्यू मिट गई। लोकल बुलियन मार्केट में भी कई शहरों में चांदी 4 लाख रुपये प्रति किलो के ऊपर से फिसलकर 3.45–3.95 लाख रुपये की रेंज में आ गई, जिससे रिटेल निवेशक और ज्वेलर्स दोनों दबाव में दिखे
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सिल्वर ETF में 14–22% की भारी चोट
ग्लोबल क्रैश का सीधा झटका भारत के सिल्वर ETF पर दिखा, जहां कई स्कीमों में एक दिन में 15–22% तक की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक SBI Silver ETF में करीब 22.4%, ICICI Prudential Silver ETF में लगभग 21% और Nippon India Silver ETF में करीब 19.5% तक की गिरावट आई। Money9 की रिपोर्ट में Nippon Silver BEES के दाम में करीब 18.6% की गिरावट दर्ज की गई, जो 286.48 रुपये के आसपास बंद हुआ और इस तेज गिरावट के बाद निवेशकों में सर्किट और लिक्विडिटी को लेकर चिंता बढ़ गई।
सर्किट लिमिट और ETF में ट्रेडिंग रिस्क
Nippon AMC ने साफ किया है कि सभी ETF पर T‑2 नेट एसेट वैल्यू से 20% का सर्किट लिमिट लागू होता है। अगर किसी दिन ETF की कीमत इस 20% लोअर बैंड से नीचे चली जाती है तो उस दिन उस स्कीम में ट्रेडिंग रोक दी जाएगी, यानी लिक्विडिटी अचानक सूख सकती है। यही नियम बाकी सिल्वर ETF पर भी लागू है, इसलिए तेज गिरावट के दौर में इंट्रा‑डे में बड़े गैप‑डाउन से शॉर्ट‑टर्म ट्रेडर्स के फंसे रहने का रिस्क बढ़ जाता है
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चांदी के लिए अहम सपोर्ट लेवल कहाँ?
ग्लोबल चार्ट्स के हिसाब से स्पॉट सिल्वर के लिए 80 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहला बड़ा सपोर्ट माना जा रहा है, जहां शुक्रवार की भारी बिकवाली के बाद प्राइस ने कुछ स्थिरता दिखाने की कोशिश की। घरेलू MCX पर शॉर्ट‑टर्म में 2.80–2.85 लाख रुपये प्रति किलोग्राम की रेंज तकनीकी सपोर्ट ज़ोन मानी जा रही है, जबकि ऊपर की तरफ 3.20–3.30 लाख रुपये अब पहला रेजिस्टेंस बन चुका है। ETF के स्तर पर, हाल की गिरावट के बाद कई फंड की यूनिट वैल्यू 15–20% नीचे नए प्राइस‑ज़ोन में शिफ्ट हो चुकी है, जहां अगला ट्रेंड ग्लोबल स्पॉट प्राइस और डॉलर इंडेक्स की चाल तय करेगा
Disclaimer : शेयर बाजार में निवेश जोखिम के साथ होता है, इसलिए निवेश से पहले विशेषज्ञ से सलाह लें। हम जानकारी की पूर्णता या सटीकता की गारंटी नहीं देते।







