Dark Horse: भारत में प्लास्टिक पाइप्स की मांग तेजी से बढ़ रही है क्योंकि हाउसिंग, सिंचाई, पानी की सप्लाई और सीवरेज जैसे काम बिना पाइप्स के पूरे नहीं हो सकते। इंडिया प्लास्टिक पाइप्स मार्केट 2025 में लगभग 5.46 अरब डॉलर से बढ़कर 2033 तक करीब 7.94 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, यानी करीब 4.8 फीसदी की सालाना ग्रोथ दिख रही है। सरकार की स्मार्ट सिटीज मिशन और जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं पानी और स्वच्छता के लिए बड़े स्तर पर पाइप बिछाने की डिमांड बना रही हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार प्लास्टिक पाइप इंडस्ट्री का साइज 2025 तक लगभग 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है, जिसे हाउसिंग और इंफ्रा इन्वेस्टमेंट से मजबूती मिल रही है।
PVC और CPVC की मांग में तेज रफ्तार
PVC पाइप्स की मांग लंबे समय तक मजबूत रहने वाली मानी जा रही है क्योंकि भारत में शहरीकरण और ग्रामीण इलाकों में पाइप्ड वाटर कनेक्शन की रफ्तार बढ़ रही है। इंडिया PVC मार्केट में 2025 से 2033 के बीच करीब 6.8 फीसदी की सालाना ग्रोथ का अनुमान है, जिसमें बड़ी हिस्सेदारी पाइप्स की है। पीवीसी की कीमतों में स्थिरता आने से मार्जिन पर दबाव पहले की तुलना में कम हो सकता है, जबकि सीपीवीसी जैसे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी बढ़ने से कंपनियों की औसत रियलाइजेशन बेहतर रह सकती है। कृषि सिंचाई और रियल्टी दोनों से ड्यूल डिमांड मिलने के कारण यह सेक्टर साइक्लिकल होते हुए भी लंबी अवधि में मजबूत थीम माना जा रहा है।
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PVC कंपनी ने बना ली है मजबूत क्षमता
प्लास्टिक पाइप्स सेक्टर की एक कंपनी ने हाल के सालों में अपनी इंस्टॉल्ड कैपेसिटी, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और प्रोडक्ट रेंज पर लगातार काम किया है। इस कंपनी के पास देशभर में मल्टीपल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और हजारों डीलरों का नेटवर्क है, जिसकी वजह से यह पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और पूर्व भारत जैसे सभी बड़े रीजन में सप्लाई कर पा रही है। कंपनी के पोर्टफोलियो में एग्रीकल्चर, प्लंबिंग, इंडस्ट्रियल और सीपीवीसी जैसे सेगमेंट के कई प्रोडक्ट शामिल हैं, जिससे उसे अलग अलग सेक्टर्स से मांग मिलती रहती है। तैयार कैपेसिटी पहले से मौजूद होने का मतलब है कि डिमांड बढ़ने पर कंपनी को नई बड़ी कैपेक्स लगे बिना वॉल्यूम बढ़ाने का फायदा मिल सकता है
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हाल के फाइनेंशियल और वैल्यूएशन की तस्वीर
कंपनी के FY24 में रेवेन्यू करीब 2,569 करोड़ रुपये रहा जो FY23 के 2,711 करोड़ रुपये के आसपास ही है, लेकिन इस दौरान फिनिश्ड गुड्स वॉल्यूम लगभग 10 फीसदी बढ़ा है। FY24 में EBITDA 23 फीसदी बढ़कर करीब 307 करोड़ रुपये और PAT 121 करोड़ से बढ़कर लगभग 183 करोड़ रुपये पर पहुंचा, यानी प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार दिखा है। जनवरी 2026 में कंपनी का शेयर प्राइस 230–240 रुपये के दायरे में ट्रेड कर रहा था और इसका मार्केट कैप लगभग 2,600 करोड़ रुपये के आसपास दिख रहा है, जो मिडकैप सेगमेंट में इसे एक अपेक्षाकृत छोटा लेकिन एक्टिव प्लेयर बनाता है। अभी वैल्यूएशन हाई पीई पर नजर आ सकता है क्योंकि कमाई साइकिल के निचले स्तर से रिकवरी के फेज में है, इसलिए मुनाफे में सुधर के साथ रेशियो सामान्य होने की गुंजाइश बनी रहती है
2026 तक Dark Horse बनने की संभावना
डिफेंस और पावर जैसे थीम पहले से बाजार की सुर्खियों में हैं, जबकि प्लास्टिक पाइप्स जैसा सेक्टर शोर कम लेकिन फंडामेंटल रूप से मजबूत डिमांड पर टिका हुआ है। हाउसिंग, रूरल वाटर सप्लाई और इंफ्रास्ट्रक्चर में चल रहे प्रोजेक्ट्स से अगले कुछ साल तक इस सेक्टर को स्थिर वॉल्यूम ग्रोथ मिलने की उम्मीद है, जिस पर कंपनी की तैयार कैपेसिटी और बढ़ती सीपीवीसी हिस्सेदारी जैसे फैक्टर अतिरिक्त बढ़त दे सकते हैं। अगर पीवीसी की कीमतें बहुत अधिक अस्थिर न रहीं और वॉल्यूम ग्रोथ FY24 जैसी डबल डिजिट रेंज के आसपास बनी रही तो 2026 तक यह बोरिंग दिखने वाला स्टॉक भी कमाई और रेवेन्यू दोनों मोर्चों पर मजबूत प्रदर्शन दिखा सकता है।
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