इन दिनों भारतीय Stock Market में तेज गिरावट देखने को मिल रही है, जिसका बड़ा कारण एफआईआई की बिकवाली, ग्लोबल अनिश्चितता, ट्रंप टैरिफ जोखिम और कमजोर टेक्निकल सिग्नल माने जा रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक विदेशी फंड फ्लो और ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी पर क्लैरिटी नहीं आती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है, हालांकि लॉन्ग टर्म के लिए यह गिरावट अच्छे स्टॉक चुनने का मौका भी दे सकती है।
हाल की गिरावट का हाल
पिछले कुछ सत्रों से सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार कमजोरी देखी जा रही है और निफ्टी 26,200 के ऊपर से फिसलकर 25,700 के नीचे तक आ चुका है। कई सेक्टर जैसे ऑयल एंड गैस, मीडिया और एनर्जी में दबाव ज्यादा है, जबकि आईटी, मेटल और फार्मा जैसे डिफेंसिव और एक्सपोर्ट बेस्ड सेक्टर में कुछ सहारा दिखा है।
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एफआईआई की बिकवाली और डीआईआई की खरीद
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने हाल के सत्रों में लगातार शेयरों की बड़ी बिकवाली की है, केवल 8 जनवरी को ही करीब 3,300 करोड़ रुपये से ज्यादा की नेट सेलिंग दर्ज हुई, जिससे इंडेक्स पर भारी दबाव बढ़ा। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशक कई दिनों से नेट बायर बने हुए हैं और उनकी खरीदारी ने पूरी गिरावट को और गहरा होने से कुछ हद तक रोक कर रखा है।
ग्लोबल माहौल और ट्रंप टैरिफ रिस्क
अमेरिका और ग्लोबल मार्केट से मिल रहे सिग्नल भी बहुत मजबूत नहीं हैं, एशियाई बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी डेटा को लेकर अनिश्चितता का असर भारतीय बाजार पर साफ दिख रहा है। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय निर्यात पर ज्यादा टैरिफ की संभावना जताने से ट्रेड वॉर और रूस पर सैंक्शन सम्बन्धी चिंताएं बढ़ी हैं, जो निवेशकों की रिस्क लेने की इच्छा को कम कर रही हैं।
वोलैटिलिटी और टेक्निकल प्रेशर
इंडिया VIX, जिसे बाजार का फियर गेज भी कहा जाता है, हाल के दिनों में लगभग 6.5 प्रतिशत उछलकर करीब 10.6 तक पहुंच गया है, जो निवेशकों की बढ़ती घबराहट को दिखाता है। टेक्निकल चार्ट पर निफ्टी ने अपने 20‑डे सिंपल मूविंग एवरेज जैसे अहम सपोर्ट लेवल तोड़े हैं और इनके टूटने के बाद शॉर्ट टर्म में बिकवाली का दबाव और बढ़ गया है।
तेजी कब तक लौट सकती है
कई ब्रोकरेज हाउस और एनालिस्ट्स का मानना है कि जब तक एफआईआई की सेलिंग धीमी नहीं पड़ती और ग्लोबल ट्रेड व टैरिफ से जुड़ा नॉइज़ कम नहीं होता, तब तक मजबूत और सस्टेनेबल तेजी देखना मुश्किल है। हालांकि जिन सेक्टर्स में हाल की गिरावट के बावजूद अर्निंग्स आउटलुक मजबूत है, जैसे फाइनेंशियल्स, कंज्यूमर और इंडस्ट्रियल्स, वहां लंबे समय के निवेशकों के लिए धीरे‑धीरे अच्छे वैल्यूएशन पर एंट्री के मौके बन रहे हैं।
Disclaimer : शेयर बाजार में निवेश जोखिम के साथ होता है, इसलिए निवेश से पहले विशेषज्ञ से सलाह लें। हम जानकारी की पूर्णता या सटीकता की गारंटी नहीं देते।







